हैं तैयार राहुल…!

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कांग्रेस पार्टी में इस बात को लेकर असमंजस है कि 19 माह के बाद होने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व राहुल गांधी करेंगे! इस पर भी चिंता है कि क्या राहुल नरेन्द्र मोदी के काबिल सहयोगी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे!

बस कुछ समय की बात है, राहुल गांधी अपनी मां की जगह अध्यक्ष बन जाएंगे। कांग्रेस के ओल्ड गार्ड की राय है कि सोनिया गांधी लोकसभा चुनाव तक पार्टी की अध्यक्ष बने रहें। लेकिन उनकी खराब सेहत भी परेशानी वाली है।

कांग्रेस का सांगठनिक चुनाव कुछ महीनों में ही होने वाला है। कैलिफोर्निया के बर्कले में आपसी बातचीत के सत्र में राहुल से पूछा गया कि क्या वे कांग्रेस का अध्यक्ष बन रहे हैं तो राहुल बोले ‘मैं इसके लिए तैयार हूं, पर पार्टी को ही इसके संबंध में अंतिम फैसला करना है।’

राहुल से पूछा गया कि क्या वह कांग्रेस का अध्यक्ष बन रहे हैं तो वे बोले ‘मैं इसके लिए तैयार हूं,
पर पार्टी को ही इसके संबंध में अंतिम फैसला करना है।’

पार्टी के लोगों, खासकर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को राहुल का चलते चलाते दिया गया बयान पार्टी के लिए परेशान करने वाला भर ही नहीं है, बल्कि इसका बचाव भी मुश्किल है।

मैं उनकी फुहड़ बात और राष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी दुहराना नहीं चाहता। लेकिन अपने पाठकों को बताना चाहता हूं कि अमेरिका में उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व प्रवासी भारतीयों ने किया था। और उन्होंने महात्मा गांधी, सरदार पटेल, आंबेडकर, मौलाना आजाद को भी प्रवासी भारतीय बता दिया।

महात्मा गांधी 1915 में भारत आने के पहले दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी भारतीय थे। लेकिन इनके अलावा जिन लोगों का नाम उन्होंने लिया वे प्रवासी भारतीय नहीं थे। उन्होंने अपने नाना नेहरू का भी जिक्र किया जो इंग्लैंड से भारत आकर स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया।

सरदार पटेल कभी भी इंग्लैंड के नागरिक नहीं रहे, न ही मौलाना आजाद। आंबेडकर को कभी भी अमेरिका की नागरिकता नहीं मिली। ये सारे नेता विदेश उच्च शिक्षा के लिए गए थे। वे लोग प्रवासी भारतीय नहीं थे। यह कहना कि प्रवासी भारतीयों ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अग्रणी लोग थे। यह तो उन भारतीयों का अपमान है जो आजादी के लिए लड़े।

राहुल का मतलब क्या है कि बाल गंगाधर तिलक, राजेंद्र प्रसाद, गोविंद वल्लभ पंत, लालबहादुर शास्त्री, सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, जयप्रकाश नारायण समेत बहुत सारे लोगों की किसी से कम भूमिका नहीं थी- स्वतंत्रता के आंदोलन में। सूची तो बहुत लंबी हो सकती है, उसमें न पड़ अमेरिका में बसे प्रवासी भारतीय को प्रसन्न करने के लिए बचकाना बयान देते रहे। इससे तो कांग्रेस पार्टी का ही मजाक बनेगा, जिसके वे अध्यक्ष बनने वाले हैं।

राहुल गांधी 47 के हो गए हैं। उनके पिता राजीव गांधी और कम उम्र में कांग्रेस अध्यक्ष बन गए थे। तब वह 40 वर्ष के थे, जब वह 1984 में अपनी मां इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारत के प्रधानमंत्री बन गए थे।

साल भर बाद 1985 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी  के बंबई अधिवेशन में उन्होंने कांग्रेस जनों की धड़कनें बढ़ा दी थी। वह कांग्रेस का सौवां साल का अधिवेशन था। राजीव गांधी ने कहा था- कांग्रेस पार्टी ‘सत्ता के दलालों’ की पार्टी बन गई है। यह कांग्रेस के भ्रष्ट और पिलपिले नेताओं पर सख्त तमाचा था।

अगर राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के नेता बन जाते हैं तो उन्हें उस पर अडिग होना होगा, जिस
पर उनका विश्वास है। उनको सत्ता के दलालों के हाथों में खेलने से परहेज
करना होगा। उनका अभी भी कांग्रेस पार्टी में बोलबाला है।

राहुल गांधी ने एक ही बार अपना रुख भ्रष्ट और अपराधी नेताओं के खिलाफ दिखाया था। लगभग 4 साल पहले, 28 सितंबर को राहुल गांधी ने अपनी हिम्मत का प्रदर्शन किया था, जब उन्होंने मनमोहन सिंह सरकार के उस अध्यादेश को फाड़ कर फेंक दिया था जो सजायाफ्ता राजनेता, खास कर लालू प्रसाद यादव को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने का विरोधी था।

उस वक्त कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में लालू यादव का चारा घोटाला वाला मुकदम लड़ रहे थे। वे राहुल गांधी की इस हरकत से गुस्से में थे। लेकिन मनमोहन सिंह की सरकार राहुल गांधी की दृढ़ता के सामने झुक गई और अध्यादेश कभी पेश नहीं हुआ। लालू की न केवल लोकसभा की सदस्यता रद्द हो गई, बल्कि कोई भी चुनाव लड़ने से छह साल के लिए रोक भी लग गई।

दुर्भाग्यवश, राहुल की बहादुरी ज्यादा न चली। कांग्रेस के सत्ता के दलालों की चली और लालू के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन में कांग्रेस शामिल हो गई। बिहार विधान सभा के 2015 चुनाव में कांग्रेस का लालू के साथ गठबंधन हुआ। इस प्रक्रिया में बहुतों ने समझा कि अध्यादेश को फाड़ने वाले ने ही फटे पन्नों को जोड़कर जैसे कह दिया हो कि लालू महान नेता हैं। भ्रष्टाचार और अपराध का राजनीति में कोई मतलब नहीं।

अगर राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के नेता बन जाते हैं तो उन्हें उस पर अडिग होना होगा, जिस पर उनका विश्वास है। उनको सत्ता के दलालों के हाथों में खेलने से परहेज करना होगा। उनका अभी भी कांग्रेस पार्टी में बोलबाला है। ऐसा हो नहीं सकता कि आप केक खाएं भी और उसे बचा कर भी रखें।  

पाठक की प्रतिक्रिया

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