हमें निर्णय का इंतजार करना चाहिए: लल्लू सिंह

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ल्लू सिंह बेलाग लपेट अपनी बात रखते हैं। वे फैजाबाद से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। यही उनकी राजनीतिक और सामाजिक कर्मभूमि रही है। अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर यथावत टीम ने उनसे यह बातचीत की है।

सवाल- अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर नरेन्द्र मोदी की सरकार में जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। इस बाबत हर स्तर पर चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। चूंकि अयोध्या नगरी आपके लोकसभा क्षेत्र में है तो यह बताएं राम मंदिर निर्माण को लेकर क्या प्रगति हुई है?

जवाब- इस देश का प्रत्येक राम भक्त चाहता है कि भगवान राम की जन्म-स्थली पर उनका एक भव्य मंदिर बने। स्वाभाविक रूप से जब देश में राष्ट्रवादी लोगों की सरकार बनी तो एक बार फिर सबके मन में यह भाव पैदा हुआ है कि अब भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण होगा। चूंकि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया था कि भगवान राम की जन्म-स्थली यही है तो समाज में लोगों का विश्वास है कि उच्चतम न्यायालय से भी राम-भक्तों के पक्ष में फैसला आएगा। पूरा संत-समाज, राम-जन्म भूमि न्यास और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग यह चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई प्रत्येक दिन हो। डॉ. सुब्रह्मण्य स्वामी ने भी इसपर ट्वीट कर अपने विचार व्यक्त किए हैं। अच्छी बात यह है कि अब इसकी संभावना बन गई है। ऐसा होने पर स्वाभाविक रूप से निर्णय जल्दी आएगा। पूरा हिन्दू समाज उम्मीद के साथ न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है।

सवाल- आखिर क्या अडचनें रहीं कि न्यायालय से बाहर एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में इस मामले को नहीं सुलझाया जा सका?

जवाब- ऐसे कई मौके आए जब दोनों पक्षों ने मिल-बैठकर इस विषय पर चर्चा की, लेकिन बात सुलझ नहीं पाई। चंद्रशेखर जी और अटलजी के समय में भी बातचीत हुई। वार्ता कई दौर की हुई। इसके बाद भी परिणाम नहीं निकल पाया। मेरे लिए यह बताना कठिन है कि ऐसा क्यों हुआ? अंतत: यही राय बनी कि अब फैसला न्यायालय से ही होगा।

देश की जनता इस मुद्दे पर अब अधिक लंबे समय तक इंतजार करने की मन:स्थिति में नहीं है। जनता चाहती है कि भगवान राम का भव्य मंदिर बने। इस बात को सभी जानते हैं। जितनी जल्दी फैसला होगा, वह देश और समाज के लिए उतना ही अच्छा रहेगा।

 

सवाल- अयोध्या आपकी सामाजिक-राजनीतिक कर्मभूमि रही है। वहां की स्थितियों को लेकर आपकी समझ किसी अन्य से काफी बेहतर और जमीनी रही है। क्या राम-मंदिर निर्माण को लेकर आपने केंद्र सरकार को कोई सलाह दी है?

जवाब- स्पष्ट कहूं तो इस बात में मेरा पूरा विश्वास है कि भगवान राम के मंदिर का निर्माण आज नहीं तो कल अवश्य होगा। तार्किक दृष्टि से भी देखें तो मेरी समझ यही कहती है। जब प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा तो लाखों-लाख की संख्या में श्रद्धालु श्रमदान करने के लिए अयोध्या नगरी आएंगे। यह जरूरी है कि अयोध्या में आवा-जाही के साधन सुगम हों। सरयू नदी के घाट स्वच्छ और सुंदर दिखें और घाटों पर 365 दिन पानी का प्रवाह बना रहे, इस दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। नगरीय व्यवस्था सुरुचिपूर्ण हो यानी पानी, बिजली और सड़क का काम पूरा हो जाए। अभी मेरी प्राथमिकता इन्हीं बातों को लेकर है। अच्छी बात यह है कि इस दिशा में काम प्रारंभ हो गया है। सड़क और रेलमार्ग को सुगम और बेहतर बनाने की दिशा में कई योजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं। अयोध्या से निकलने वाली सभी सड़के अब चार लेन की होंगी। इसकी स्वीकृति भी मिल गई है। अब इसका शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। राम-जानकी मार्ग को राष्ट्रीय मार्ग का दर्जा प्राप्त होगा। पर्यटन की दृष्टि से जो भव्यता अयोध्या नगरी की होनी चाहिए, उस दिशा में भी कई कार्य हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने इसके लिए विशेष तौर पर बजट आवंटित किए हैं।  

सवाल- राम-मंदिर निर्माण की बात को लेकर देश के कई हिस्सों में सामाजिक सौहर्द का वातावरण बिगड़ता रहा है। अयोध्या में क्या स्थिति है?

जवाब- अयोध्या में किसी प्रकार का तनाव नहीं रहा है और वह होना भी नहीं चाहिए। सच तो यह है कि अल्पसंख्यक समाज के लोग भी इस बात को मानते हैं कि अयोध्या श्रीराम की जन्म भूमि है और मंदिर का निर्माण होना चाहिए। उन्हें केवल इस बात का डर है कि मुसलमान शासकों के कालखंड में जिन हजारों मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाए गए थे, उनको लेकर विवाद खड़ा न हो जाए। उनके मन में यह अटकाव है या कहें भय है। फिर भी मंदिर निर्माण के पक्ष में देश भर में एक वातावरण बन रहा है। साथ ही अल्पसंख्यक समाज के मन में जो अटकाव हैं, वे दूर हो रहे हैं। मुझे इस बात का विश्वास है कि 2018 में ही या अगले एक-दो साल में भव्य राम-मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा।

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सवाल- अल्पसंख्यकों के मन में यह अटकाव या भय क्या स्वाभाविक है?

जवाब- यह स्वाभाविक नहीं है, बल्कि इसे पैदा किया गया है। केंद्र और खासकर उत्तर प्रदेश में जो पिछली सरकारें आईं, उन्होंने वोट की राजनीति के लिए इस डर को पैदा किया और बनाए रखा।

सवाल- विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) से आपके गहरे आत्मीय संबंध रहे हैं। मंदिर निर्माण की तैयारी को लेकर विहिप, भाजपा और सरकार के बीच क्या बातचीत चल रही है?

जवाब- भारतीय जनता पार्टी शुरू में ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह भव्य मंदिर निर्माण के पक्ष में है और उस कार्य में वह पूरा सहयोग देगी। मंदिर निर्माण का कार्य विहिप करेगी। आज भी दोनों अपनी-अपनी बात पर अडिग हैं।  मैं यह स्पष्ट कर दूं कि विश्व हिन्दू परिषद का गठन दुनिया में फैले हिन्दू समाज को एकजुट करने और हिन्दू संस्कृति को संरक्षित करने के लिए हुआ था। वह इसी कार्य में पूरी तन्मयता से जुटा रही है। चूंकि पूरा हिन्दू समाज और साधु-संत चाहते थे कि प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर का निर्माण हो तो विहिप ने इस कार्य को अपने हाथों में लिया है। विहिप और भाजपा के वरिष्ठ लोगों के बीच संवाद होता रहता है। मुझे विश्वास है कि वे लोग कोई न कोई उचित रास्ता जरूर निकाल लेंगे।

सवाल- अयोध्या के स्थानीय लोगों से आपका संवाद जरूर होता होगा। वे अपने मन की बात आपने साझा करते होंगे। क्या उन बातों को लेकर आपने केंद्रीय नेतृत्व से कभी कोई बातचीत की है?

जवाब- देखिए, हमारा केंद्रीय नेतृत्व सजग और सक्षम है। वह समाज की आकांक्षाओं से भी परिचित है। आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर मेरी भी बातचीत होती रहती है।

अयोध्या में किसी प्रकार का तनाव नहीं रहा है। वह होना भी नहीं चाहिए। सच तो यह है कि अल्पसंख्यक समाज के लोग भी इस बात को मानते हैं कि अयोध्या श्रीराम की
जन्म भूमि है और मंदिर का निर्माण होना चाहिए।

सवाल- उच्चतम न्यायालय इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रति दिन सुनवाई के पक्ष में दिख रहा है। इसका क्या अर्थ लगाया जाए, क्या फैसला जल्द आने वाला है?

जवाब- देश की जनता इस मुद्दे पर अब अधिक लंबे समय तक इंतजार करने की मन:स्थिति में नहीं है। जनता चाहती है कि भगवान राम का भव्य मंदिर बने। इस बात को सभी जानते हैं। जितनी जल्दी फैसला होगा, वह देश और समाज के लिए उतना ही अच्छा रहेगा। मेरे विचार में इस मसले पर फिर से किसी जनआंदोलन का खड़ा होना ठीक नहीं है

सवाल- क्या यह भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक मुद्दा मात्र है? क्योंकि 2019 आने वाला है और राम-मंदिर फिर से चर्चा में है।  

जवाब- मंदिर निर्माण की बात तो भारतीय जनता पार्टी के घोषणा-पत्र में है। उत्तर प्रदेश विधानसभा (2017) चुनाव में भी हमने लोगों से यह वादा किया है। जब से यह विषय खड़ा हुआ है, तब से भाजपा मंदिर निर्माण की बात कह रही है। अब उच्चतम न्यायालय को अपना निर्णय देना है। हमें निर्णय का इंतजार करना चाहिए।

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