शिलांग में भड़की हिंसा का सच

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पूरब के स्कॉटलैंड के नाम से विख्यात हिल स्टेशन शिलांग में लगभग दो दशक के अंतराल के बाद झड़प की एक छोटी सी घटना ने विकराल रूप धारण कर लिया और हालात पर काबू पाने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा।

हिंसा को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया गया और फेक न्यूज़ को प्रचारित किया गया। पुलिस सूत्रों और स्थानीय नागरिकों के दिए गए विवरण से पता चलता है कि 31 मई 2018 को एक खासी लड़के और एक सिख महिला के बीच विवाद हुआ।

लड़का उस सरकारी बस में सवार था जिसे उसका रिश्तेदार चला रहा था। बस की पार्किंग को लेकर झगड़ा शुरू हुआ। चूंकि पार्किंग की वजह से महिलाओं को सार्वजनिक नल से पानी भरने में परेशानी हो रही थी|

इस मामूली झड़प की घटना ने अगले दिन एक जून को हिंसक रूप ले लिया। खासी लोगों की उत्तेजित भीड़ ने एक दुकान और एक घर में आग लगा दी और कम से कम पांच वाहनों को फूंक दिया।

इस हिंसा में दस लोग घायल हुए। घायलों में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं|। पुलिस ने उस दिन दस असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार किया। भीड़ ने पंजाबी गली के एक घर में आग लगा दी और सुरक्षा बल पर पत्थर व पेट्रोल बम बरसाए।

उसके तुरंत बाद सेना ने शांति कायम करने के लिए फ्लैग मार्च किया। सेना ने 200 महिलाओं-बच्चों  समेत पांच सौ व्यक्तियों को सुरक्षित आश्रय भी दिया। पुलिस ने लगातार हो रही पत्थरबाजी के बीच संयम से काम लिया और उसने उत्तेजित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग किया।

“मेघालय के हिल स्टेशन शिलांग में लगभग दो दशक के अंतराल के बाद झड़प की एक छोटी सी घटना ने विकराल रूप धारण कर लिया। हिंसा को फैलाने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया गया और फेक न्यूज को प्रचारित किया गया।”

शहर में इन्टरनेट और एसएमएस सेवा को बंद कर दिया गया। शिलांग के लिए इस तरह की हिंसा कोई नई बात नहीं है। अस्सी के दशक के उत्तरार्द्ध और नब्बे के दशक के पूर्वार्द्ध में स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय के मसले को लेकर अक्सर बंद आहूत होते थे और हिंसक झड़पें भी होती रहती थीं लेकिन पिछले दो दशकों में शहर की कानून-व्यवस्था में काफी सुधार हुआ और इसके साथ ही पर्यटन उद्योग को भी फलने-फूलने का अवसर मिला।

इस बार हिंसा की वजह से दूरदराज से आये पर्यटक भी फंस गए। ऐसे पर्यटक घूमने की इच्छा छोड़कर सुरक्षित वापस लौटने में ही अपनी भलाई समझेंगे। हिंसा की वजह से सबसे अधिक राज्य का पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा और पर्यटकों का विश्वास जीतने के लिए राज्य सरकार को कारगर कदम उठाने पड़ेंग।

शिलांग में स्थानीय बनाम बहिरागत के मुद्दे पर हिंसक टकराव का लम्बा इतिहास रहा है|। इस तरह की हिंसा के चलते अनेक निर्दोष लोग जान गंवाते रहे हैं| और तो और,साल 2012 में इनर लाइन परमिट की मांग को लेकर शुरू किये गए आन्दोलन के दौरान दो गैर-स्थानीय व्यक्तियों को दिनदहाड़े जिन्दा जला दिया गया था।

उस समय प्रशासन ने कारगर कदम उठाते हुए हालात को नियंत्रित कर लिया था। उसके बाद पर्यटन उद्योग से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने लगा और अमन का वातावरण निर्मित होता गया। लेकिन एक बार फिर जिस तरह हिंसा फैली, उसकी वजह से पर्यटन उद्योग को ही सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।

“मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा का कहना है  कि कुछ शरारती तत्व ऐसे हैं जो हिंसा फैलाने के लिए युवाओं का वित्त पोषण करते हुए उन्हें शराब और रुपयों की आपूर्ति कर रहे हैं।”

लगातार जारी हिंसा के बीच राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने पत्रकारों को बताया कि कुछ शरारती तत्व ऐसे हैं जो हिंसा फैलाने के लिए युवाओं का वित्त पोषण करते हुए उन्हें शराब और रुपयों की आपूर्ति कर रहे हैं|। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई है उसे ‘साम्प्रदायिक’ कहना उचित नहीं है और यह हिंसा एक मोहल्ले तक ही सीमित है।

संगमा ने कहा कि पत्थरबाजी में शामिल लोगों ने गिरफ्तार होने के बाद कबूल किया है कि उन्हें कुछ लोग आन्दोलन चलाने के लिए पैसे मुहैया कराये जाते रहे हैं। प्रशासन की तरफ से ऐसे लोगों के खिलाफ कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जो लोग भीड़ की शक्ल में पहुंच कर हिंसा कर रहे हैं, वे सभी बाहरी लोग हैं। पांच जून को राज्य सरकार ने ऐलान किया कि पंजाबी गली के निवासियों को कही और बसाने की मांग पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा घटना के दिन युवक के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने का भी आश्वासन दिया गया।

ईस्ट खासी हिल्स जिले के उपायुक्त पी एस दखार ने बताया कि आंदोलनकारियों को सरकार के फैसले के बारे में बता दिया गया है और उम्मीद है कि वे अपनी मांगों के सन्दर्भ में सरकार के रुख से संतुष्ट होकर अपना आन्दोलन समाप्त कर देंगे।

इससे पहले हॉकरों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला और आन्दोलनकारियों की मांगों पर विचार-विमर्श किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना को फेक न्यूज़ के जरिये साम्प्रदायिक रंग देने और खासी लोगों की छवि खराब करने की कोशिश की गई है|। शहर में पेयजल की किल्लत है और लोग पानी के लिए नल के सामने कतार लगाकर घंटों खड़े रहते हैं।

दूसरी तरफ तंग सड़कें के चलते यातायात जाम की समस्या का सामना लोगों को करना पड़ता है। स्थानीय मीडिया ने घटना का मूल विवरण इस तरह प्रकाशित  किया है-‘सवेरे 9.30 बजे एक पंजाबी महिला सरकारी बस के तीन नाबालिग खलासियों को फटकार रही थी और बस को हटाने के लिए कह रही थी, चूंकि बस की वजह से उसे सार्वजनिक नल से पानी भरने में दिक्कत हो रही थी।

तीनों लड़के बस चलाना नहीं जानते थे। एक लड़के ने उस महिला को बताया कि बस का चालक उसका पिता था जो करीब ही चाय दुकान में चाय पीने गया था। उसने महिला से कहा कि थोड़ी देर वह इंतजार कर ले। नाराज होकर महिला वापस गई और अपने साथ कुछ युवकों को लेकर लौटी।

युवकों ने तीनों खासी लड़कों की पिटाई की। बस चालक जब लौटकर आया तो उसने अपने दोनों बेटे और भतीजे को घायल अवस्था में देखा। उसने तुरंत सड़क किनारे के हॉकरों की मदद से लड़कों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया और थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर सुलह करवा दी।

शाम होते-होते बात का बतंगड बना दिया गया। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ प्रचारित कर दिया गया कि बस चालक के पुत्र की मौत हो गई। हकीकत में दोनों लड़के ठीक होकर घर लौट आये।

फिर फेक न्यूज़ में प्रचारित किया गया कि खासी लड़कों ने पंजाबी महिला के साथ छेड़छाड़ की थी और इसी बात पर झगड़ा शुरू हुआ। टीवी चैनलों ने आग में घी डालने का काम किया और अलग-अलग ताकतें अपने स्वार्थ की रोटी सेंकने में जुट गई।

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