वादा नहीं, ठोस परिणाम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब छह महीने के अंतराल के बाद अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी गए। इस दो दिवसीय दौरे को एक आभार यात्रा के रूप में भी देखा गया।

पिछली यात्रा विधानसभा चुनाव के समय हुई थी, जब मोदी ने इस शहर में दो दिन का प्रवास किया था। उनके चुनावी कार्यक्रमों और रोड-शो ने मतदान पर निर्णायक असर डाला था। शहर और आसपास की सभी सीटें भाजपा की झोली में आ गई थीं।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने व्यस्त कार्यक्रमों के कारण वह बाद में वाराणसी नहीं आ पाए। लेकिन इस प्राचीन नगर के विकास के लिए जिन परियोजनाओं की उन्होंने घोषणा की थी या शिलान्यास किया था, उनका क्रियान्वयन जारी रहा।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस काम में और तेजी आयी तथा बहुत सी परियोजनाएं समय से पहले ही पूरी कर ली गयीं। विकास और क्रियान्वयन की इस शैली को मोदी इस रूप में व्यक्त किया- ”जिस परियोजना का हम शिलान्यास करते हैं, उसका उद्घाटन भी हम ही करते हैं।” यह कथन सटीक है, क्योंकि मोदी ने अपने दौरे में जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया, उनमें से कुछ तो दस साल से लटकी हुई थीं।

धरती पर अवतरित हुई ‘मोदी यादव’ भी इसका साक्ष्य देता है। इस शिशु का जन्म 23 सितम्बर को नवउद्घाटित बलुआ घाट पुल पर हुआ। माता पिता ने शिशु का नाम नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह यादव के नामों को जोड़कर रखा। मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2006 में इस पुल का शिलान्यास किया था और 11 वर्ष बाद मोदी ने उसका उद्घाटन किया। गंगा नदी पर बना यह पुल चंदौली जिले को वाराणसी से जोड़ता है।

तीन वर्षों में वाराणसी में जो विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं, उनके फलीभूत होने का
समय आ रहा है। नगर की विद्युत वितरण प्रणाली का कायाकल्प हो गया है।
शहर की सड़कें एलईडी से रोशन हैं।

जीटी रोड से पूर्वी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए संपर्क सुविधाओं के विस्तार में यह बहुत उपयोगी होगा। मोदी ने सामने घाट और रामनगर के बीच गंगा पर ही बने एक दूसरे पुल का लोकार्पण भी किया। यह पुल शहरी क्षेत्र में ही है और यह एक सौ साल से पुराने राजघाट पुल पर दबाव कम करेगा।

सांस्कृतिक रूप से भी इस पुल का विशेष महत्व है। विश्वप्रसिद्ध रामनगर रामलीला को देखने जाने वाले लोगों के लिए यह पुल वरदान साबित होगा। रामलीला में लोगों की भागीदारी अब और सुगमता से हो सकेगी। मोदी ने अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि योगी ने छह महीने में ही राज्य में विकास का नया अलख जगा दिया है।

वाराणसी अपनी हस्तकला और साड़ी निर्माण के लिए भी विश्वविख्यात है। देश के हर घर में नवविवाहिता एक बनारसी साड़ी जरूर रखती है। सरकारी प्रोत्साहन के बिना भी कारीगरों ने इस हुनर को कायम रखा है। अब अनुकूल माहौल के कारण इन गतिविधियों में नयी जान आने की उम्मीद बंधी है।

मोदी ने शहर के बाहरी इलाके बड़ा लालपुर में एक हस्तकला संकुल का उद्घाटन किया। दीनदयाल हस्तकला संकुल का शिलान्यास मोदी ने नवंबर 2014 में किया था और 274 करोड़ से निर्मित यह संकुल रिकॉर्ड समय में बन कर तैयार हो गया। यह केंद्र वाराणसी ही नहीं आसपास के जिलों के कारीगरों के हुनर को देश दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

इस धार्मिक नगरी में देश भर और विदेशों से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। इस संकुल में उन्हें एक ही स्थल पर वाराणसी के कारीगरों द्वारा निर्मित साज सामान मिल सकेंगे। मोदी ने कहा कि यह संकुल पर्यटन से होने वाली आय का जरिया बनेगा। हर पर्यटक वाराणसी  यात्रा की कुछ सौगात अपने साथ लेकर जाएगा।

वाराणसी के कारीगरों को आर्थिक संसाधान मुहैया करने के लिए अनेक संस्थाएं आगे आ रही हैं। इनमें से एक उत्कर्ष बैंक है जिसके संचालक गोविन्द सिंह वाराणसी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कारोबार केंद्रित कर रहे हैं। मोदी ने इस बैंक के कार्यों की प्रशंसा की तथा बैंक के मुख्यालय की आधारशिला रखी।

वाराणसी के जनजीवन की एक विशेषता उसकी मोक्षदायिनी ख्याति है। दूर दूर से लोग यहां अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने आते हैं। मुख्य रूप से मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर दाह संस्कार होता है। हर अर्थी के साथ शोकसंतप्त लोगों का समूह भी होता है। शव यात्रा को शहरी क्षेत्र से गुजरना होता है जो भारी ट्रैफिक के कारण बहुत असुविधाजनक साबित होता है।

मोदी ने इस समस्या के समाधान के लिए एक अभिनव सुझाव दिया था। नदी मार्ग से शवों को घाटों तक पहुंचाने के इस सुझाव पर अब अमल शुरू हो गया है। जल शव वाहन के जरिये शव आसानी से घाटों तक लाये जा सकेंगे और और जल एम्बुलेंस के जरिये मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकेगा। शहरी जीवन के लिए यह बहुत राहत होगी।

वाराणसी अपनी हस्तकला और साड़ी निर्माण के लिए भी विश्वविख्यात है। देश के हर घर
में नवविवाहिता एक बनारसी साड़ी जरूर रखती है। सरकारी प्रोत्साहन के बिना
भी कारीगरों ने इस हुनर को कायम रखा है।

कूड़ा करकट और गंदगी वाराणसी की एक बड़ी समस्या है। मोदी ने नगर के पहाड़ी इलाको में कूड़े से ऊर्जा बनाने का एक संयंत्र का लोकार्पण भी किया। गंगा शुद्धिकरण योजना का लंबा इतिहास है। वर्ष 1986 में वाराणसी के राजेंद्र प्रसाद घाट पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की थी, लेकिन यह अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाई। आधे अधूरे मन से रेंग रही इस परियोजना में मोदी सरकार ने नई जान फूंकी है। गंगा शुद्धिकरण के इस यज्ञ में निजी क्षेत्र को भी भागीदार बनाया गया है।

उद्यमी सुभाष चंद्र की कंपनी एसेल इंफ्रा ने पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप के तहत रमना गांव में एक मल-जल शोधन संयंत्र निर्मित करने का बीड़ा उठाया है। यह संयंत्र गंगा के शहर में प्रवेश करने के स्थल पर बनेगा। शहर के मलजल को यहां शोधन के लिए पहुंचाया जाएगा। पांच करोड़ लीटर मल-जल का शोधन करने के क्षमता वाला यह संयंत्र 18 महीने में बनकर तैयार हो जाएगा तथा बाद में 15 वर्षों तक इसका संचालन कंपनी ही करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस संयंत्र का शिलान्यास करते हुए कहा कि यह संयंत्र नगर की भावी जनसंख्या को ध्यान में रख कर बनाया गया है ताकि अनेक दशकों तक यह कारगर साबित हो सके। संयंत्र में मल-जल शोधन की जिस अधुनातन बैच सीक्वेंसिंग रिएक्टर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, उससे शोधित निकास को सिंचाई के उपयोग में लाया जा सकेगा।

मोदी ने अपने दौरे में नगर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की योजनाओं की शुरुआत भी की। तुलसीमानस मंदिर में उन्होंने रामायण पर डाक टिकट जारी किया तो उपेक्षित पड़े गुरुधाम मंदिर की पुनर्सज्जा के काम का भी श्रीगणेश किया। यह मंदिर दुनिया में अनोखा तांत्रिक मंदिर है। काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप अन्नक्षेत्र संकुल में  तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने और भोजन की व्यवस्था होगी। 13 करोड़ रुपये की लागत वाला यह अन्नक्षेत्र अगले वर्ष सावन तक बनकर तैयार हो जाएगा। यह अन्नक्षेत्र कश्मीर के महाराजा के महल में बनेगा।

काशी में अन्नक्षेत्रों का पुराना इतिहास है। यहां संन्यासियों और जरूरतमंद लोगों के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था देश भर के राजे महाराजे करते थे। एक किवदंती यह है कि ग्वालियर राजपरिवार के सदस्य तभी भोजन ग्रहण करते थे, जब काशी के उनके अन्नक्षेत्र में भोजन वितरित हो जाता था। काशी से टेलीग्राम के जरिये ग्वालियर सूचना भेजी जाती थी कि यहां अन्नक्षेत्र में भोजन वितरित हो गया है।

मोदी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मालवीय नीतिशास्त्र केंद्र और शिक्षा संकाय में चाणक्य सभागार का लोकार्पण भी किया। प्रधानमंत्री ने अपने प्रवास के दूसरे दिन एक बृहत पशु आरोग्य मेले का उद्घाटन भी किया। अपनी चिरपरिचित शैली में उन्होंने कहा कि हम विकास का काम वोटों को ध्यान में रख कर नहीं करते। हमें उन प्राणियों की भी चिंता है जो कभी वोट नहीं देते।

शाहंशाहपुर गांव में गंगातीरी नस्ल की गायों के संरक्षण का काम हो रहा है। पशु आरोग्य मेलों का आयोजन अब पूरे प्रदेश में किया जाएगा जो मूक प्राणियों के लिए वरदान सिद्ध होगा।

अपने संसदीय क्षेत्र और अपने गृह राज्य गुजरात के बीच संबंध प्रगाढ़ करने के क्रम में मोदी ने वाराणसी और बड़ोदरा के बीच एक नयी ट्रेन मेहमान एक्सप्रेस का शुभारम्भ भी किया। पिछले तीन वर्षों में वाराणसी में जो विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं उनके फलीभूत होने का समय आ रहा है। नगर की विद्युत वितरण प्रणाली का कायाकल्प हो गया है। शहर की सड़कें एलईडी से रोशन हैं। कूड़ा संग्रह और निस्तारण की कारगर व्यवस्था अमल में आ रही है। नगरवासियों को अब शहरी नजीवन में सुधार महसूस हो रहा है।

आगामी दिनों में यह प्रक्रिया जारी रहेगी और देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी के शाश्वत आकर्षण में और निखार आएगा।

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