ब्रह्मा के पुत्र की हत्या !

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ब्रह्मपुत्र के अलावा सिंधु और सोन ये तीन जलधाराएं नदियां नहीं नद हैं। यानी इन्हें पुरुषवाचक नाम दिए गए हैं। इसके पीछे भी मिथकीय कहानियों में लिपटे सामाजिक और पर्यावरणीय कारण हैं, लेकिन इनके नद होने की कहानी फिर कभी।

यहां बात हो रही है ब्रह्मपुत्र और उसकी हत्या के लिए बिछाए जा रहे जाल की। तिब्बत की यारलुंग सांगपो, अरुणाचल की सियांग और असम की ब्रह्मपुत्र एक ही है।

उसकी टूटती जुड़ती जलधाराओं के भी अलग-अलग नाम हैं। कुल मिलाकर ब्रह्मपुत्र के अपने उद्गम से लेकर समुद्र में मिलने तक पचास से ज्यादा नाम हैं।

“ब्रह्मा के पुत्र का जाना पूरे हिमालय क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी तक के लिए खतरे की घंटी है। यह किसी नद की नहीं सभ्यता की हत्या है।”

ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्रह्मपुत्र धरती में बहने वाली एकमात्र ऐसी अनोखी धारा है जो अपने उद्गम में डेल्टा की तरह व्यवहार करती है यानी वो अपने उद्गम में ही कई धाराओं में टूटती है जैसे अन्य नदियां समुद्र में मिलने से पहले डेल्टा बनाती हैं।

धाराओं में टूटने और तेज बहाव के चलते हर धारा को एक नया नाम मिल जाता है। इनका बहाव अनियंत्रित है इसलिए ब्रह्मपुत्र को बांधने की कोशिश काल को आमंत्रण है।

बावजूद इसके उसकी कई धाराओं को रोका गया है। चीन में वैज्ञानिकों का एक दल इस बात की संभावना तलाश रहा है कि क्या ब्रह्मपुत्र के पानी को तिब्बत से मोड़ कर शिनजियांग तक ले जाया जा सकता है।

यहां से शिनजियांग की दूरी तकरीबन एक हजार किलोमीटर है। प्रस्तावित सुरंग चीन के सबसे बड़े प्रशासनिक प्रांत को पानी पिलाने का काम करेगी। बेशक चीन इस बात से इनकार कर रहा है कि वह दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बनाने जा रहा है।

लेकिन जिस तरह अभी उसके युन्नान प्रांत में छह सौ किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का काम चल रहा है, उसे देखते हुए इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि जल्दी ही वह बह्मपुत्र को मोड़ने का काम शुरू करेगा।

इन आशंकाओं के बीच चीन से होते हुए अरुणाचल में प्रवेश करने वाली धारा सियांग का पानी काला और बेहद प्रदूषित होने की खबरें आई है। इस पानी में मिट्टी,गंदगी के अलावा सीमेंट मिले होने के प्रमाण मिले हैं।

माना जा रहा है कि यह सीमेंट उसी छह सौ किलोमीटर सुरंग निर्माण से निकला मलबा है। इस पानी में बड़ी संख्या में मछलियां मरी पाई गई हैं। यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि सियांग नदी ब्रह्मपुत्र की सर्वाधिक साफ और मीठे पानी वाली धारा है और हमेशा से रही है।

हालांकि भारत सरकार इस बदलाव के कारण उस भूकंप में ढूंढ़ रही है, जो 17 नवंबर को तिब्बत में आया था। इस उच्च तीव्रता वाले भूकंप से नदी के मार्ग में अस्थायी बाधा उत्पन्न हो गई थी।

“ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की ओर से कई बांध बनाए जाने को लेकर भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन जब चाहे भारतीय क्षेत्र में बाढ़ ला सकता है।”

इसके अलावा भी चीन तिब्बत पर अब तक का सबसे बड़ा पावर प्रोजेक्ट लगाने की तैयारी कर रहा है,जो ब्रह्मपुत्र पर बने जैंगमू डैम से भी काफी बड़ा है।

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की ओर से कई बांध बनाए जाने को लेकर भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन जब चाहे भारतीय क्षेत्र में बाढ़ ला सकता है। इसका सीधा असर गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा पर भी पड़ेगा।

चीन खुद के ऊपरी हिस्से में होने का पूरा फायदा उठाने के मूड में है हालांकि दुनिया भर में ऊपरी हिस्से में बैठे देश नदी को अपनी बपौती समझते हैं और निचले हिस्से से बांटने में परहेज करते हैं, यह समस्या पानी की कमी के साथ लगातार बढ़ती जा रही है।

हम भी गंगा को लेकर बांग्लादेश के साथ और सिंधु, झेलम को लेकर पाकिस्तान के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं। लेकिन ब्रह्मा के पुत्र का जाना पूरे हिमालय क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी तक के लिए खतरे की घंटी है। यह किसी नद की नहीं,सभ्यता की हत्या है।

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