बजट मंथन

0
208

वादे, इरादे, दावे और आंकड़ों के इस बजट में गंगा को मथने की कोशिश भी की गई है। गंगा सफाई योजना को अलग से पैसा तो कुछ नहीं दिया गया लेकिन दो हजार करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी जल संसाधन, गंगा सरंक्षण एवं नदी विकास मंत्रालय को दी गई है।

अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने दावा किया कि गंगा सफाई उन खास वादों में से एक है जहां सरकार ने काम करके दिखाया है, हालांकि उमा भारती को इसलिए हटाया गया था क्योंकि वे काम करके नहीं दिखा पाई थी।

इस बजट भाषण में पहली बार गंगा में चल रही परियोजनाओं और शीध्र शुरू की जाने वाली योजनाओं के आंकड़े भी सामने आए। गंगा से जुड़े 187 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और इसमें से 47 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं। लेकिन यह भी चिंता की बात है कि इन 47 प्रोजेक्ट को पूरे होने में पूरे चार साल लग गए बाकि 130 प्रोजेक्ट्स में से ज्यादातर प्रारंभिक स्तर पर हैं और कई तो टेंडर प्रक्रिया में ही है।

“ गंगा संरक्षण मंत्री का दावा 2019 तक अस्सी फीसद गंगा साफ करने का है यह दावा भले दूर की कौड़ी हो लेकिन गडकरी काम करते नजर आ रहे हैं। जल्दी ही वे तलछट नीति का
मसौदा सामने रखने वाले है जो हल्दिया से इलाहाबाद तक
जलमार्ग की रीढ़ बनेगी। ”

बजट भाषण में कहा गया कि गंगा सफाई का काम अब तेजी पकड़ चुका है लेकिन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। 47 पूरे हो चुके प्रोजेक्ट में से 43 तो पूराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पुराने दाह संस्कार केंद्रों को विकसित करने वाले ही है, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में एक भी नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कंपलीट नहीं हुआ है।

इन राज्यों में गंगा अपनी लंबाई का 90 फीसद बहती है। इसके अलावा पूरे गंगा पथ पर एक भी नया दाह संस्कार केंद्र नहीं बना है। जबकि नमामि गंगे के तहत नए घाटों और दाह संस्कार के स्थानों के लिए 1200 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। गंगा ग्रामों में स्वच्छता, वृक्षारोपण, गंगा की जैव विविधता संरक्षण और तट विकास का एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है।

गंगा पथ पर 4470 गांव है, बजट भाषण में इन सभी के खुले में शौच मुक्त होने का दावा किया गया है जिनमें से 667 गांवों के प्रतिनिधियों को पिछले दिनों राजधानी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर इकट्ठा किया गया था।

“बजट भाषण में कहा गया कि गंगा सफाई का काम अब तेजी पकड़ चुका है लेकिन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े अलग ही तस्वीर पेश करते हैं।”

लेकिन अब तक सरकार ने इन गांवों के दावों की पड़ताल नहीं की है यानी इनमें से कई गांवों को अब तक शौच मुक्त प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है इसके अलावा शौच मुक्त दावों की पोल खोलती कई मीडिया रिपोर्टे भरी हुई हैं।

गंगा संरक्षण मंत्री का दावा 2019 तक अस्सी फीसद गंगा साफ करने का है यह दावा भले दूर की कौड़ी हो लेकिन गडकरी काम करते नजर आ रहे है। जल्दी ही वे तलछट नीति का मसौदा सामने रखने वाले है जो हल्दिया से इलाहाबाद तक जलमार्ग की रीढ़ बनेगी।

सरकार को इसके लिए बनने वाले ग्यारह बैराजों के पर्यावरणीय प्रभावों पर भी विस्तृत चर्चा करनी होगी। मंत्रालय प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को धरातल पर लाने में भी जुटा हुआ है लेकिन सभी आंकड़ो से ऊपर इसकी सफलता की अनिवार्य शर्त गंगा में पानी का होना है, नदी के पास होगा तभी वो दे पाएगी, चाहे हम उसे कितना भी मथते रहे।

पाठक की प्रतिक्रिया

Please enter your comment!
Please enter your name here