फर्जी नहीं था बटला हाउस एनकाउंटर

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इंडियन मुजाहिद्दीन (आईएम) के 32 वर्षीय आतंकी आरिज खान उर्फ जुनैद को दिल्ली पुलिस ने पकड़ लिया है। उसने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में बम धमाके करने की साजिश रची थी। 2008 में बटला हाउस से यही बचकर भागा था।

इसके बाकी साथी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। इन खूंखार आतंकियों की मौत पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी फूट-फूट कर रोईं थीं। केंद्र सरकार में तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने आजमगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए यही कहा था।

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने पूरे एनकाउंटर को फर्जी करार दे दिया। वह यहीं नहीं रुके। उन्होंने इस मुठभेड़ की न्यायिक जांच करवाने की मांग तक कर डाली।

वह भी तब जबकि उस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस ने अपने जांबाज अधिकारी मोहन चंद शर्मा को खो दिया था। उस घटना को याद करते हुए पुलिस अधिकारी बताते हैं कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मोहन चंद शर्मा सात से आठ पुलिस के जवानों के साथ दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस फ्लैट नंबर एल-18 में सुबह 10.30 पर पहुंचे थे।

सब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र एक टेलीकॉम फर्म का एजेंट बनकर फ्लैट का दरवाजा खुलवाने के मकसद से आगे बढ़े। जबकि बाकी के जवान सीढि़यों पर उनके इशारे का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद का वाकया सबके सामने है।

“भारत में सीरियल ब्लास्ट करने वाला आतंकवादी आरिज खान
उर्फ जुनैद बिहार के रास्ते नेपाल भागा था। वहां पहले रेस्टोरेंट
खोला फिर टीचर बन गया।”

पुलिस और आतंकियों की इस मुठभेड़ के बाद इस मुद्दे पर लगातार  राजनीति होती रही। हालांकि मीडिया और विपक्ष के दबाव में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने दिग्विजय सिंह के बयान से खुद को अलग कर लिया था।

उन दिनों भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी में एक कद्दावर विपक्षी नेता की भूमिका में थे। एक कार्यक्रम के दौरान बटला हाउस एनकाउंटर पर हो रही राजनीति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये बेहद दुख:द है कि पुलिस का एक जवान आतंकवादीयों से लड़ता हुआ शहीद हो जाता है।

लेकिन कुछ राजनेता अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए एनकाउंटर को फर्जी करार दे देते हैं। तब के आन्दोलनकारी और अब के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एनकाउटंर पर शंका जताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। केजरीवाल ने उस दौरान एक वीडियो टेप जारी करते हुए कहा, ‘क्या उन मारे गये युवाओं को जिंदा पकड़ा जा सकता था।

अगर वो दोषी थे तो उनकों जिंदा नहीं पकड़ना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। लेकिन अगर ये एनकाउंटर फर्जी था तो इसके  दोषी पुलिस वालों को सजा मिलनी चाहिए।’

भारत में सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम देकर फरार हुए इंडियन मुजाहिद्दीन के आतंकी आरिज उर्फ जुनैद को दस साल बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है।

बटला मुठभेड़ कांड में इंडियन मुजाहिद्दीन के दो आतंकी मारे गए थे और दो को गिरफ्तार कर लिया गया था। मुठभेड़ के दौरान जुनैद फरार हो गया था।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ा आईएम का ब्लास्ट विशेषज्ञ व खूंखार आतंकी जुनैद को पुलिस की सख्ती की वजह से कोई भी ठिकाना मुहैया कराने व रकम देने के लिए तैयार नहीं हुआ।

जिसके बाद उसने तय किया कि वह अपने नेटवर्क के साथियों व रिश्तेदारों को बताए बिना उनके शहर में जाएगा और वहीं के पीसीओ के जरिये उनसे बात करेगा।

इसका मकसद यह था कि जांच एजेंसियों के दायरे में उसके नेटवर्क लोग न आएं। शातिर दिमाग आतंकी जुनैद के बारे में स्पेशल सेल ने यह भी बताया कि सीमापार भागने के पहले उसने एक जगह पर चंद घंटों से ज्यादा का समय नहीं बिताया।

“स्पेशल सेल ने बताया कि विद्यार्थी उसे सलीम सर के नाम से
जानते थे। लेकिन कोई ये भांप नहीं सका कि जिसको वे अध्यापक
समझ रहे हैं उसके हाथ कई बेगुनाहों के खून से सने हैं।”

इंजीनियरिंग में स्नातक जुनैद राजधानी के जामिया नगर स्थित बटला हाउस एनकाउंटर के समय अन्य आतंकियों के साथ मौजूद था। फरारी के दौरान वह एक माह तक भारत में ही रहा और फिर नेपाल भाग गया।

गौरतलब है कि उसकी गिरफ्तारी पर लगभग 15 लाख रुपये का ईनाम घोषित था। डीसीपी प्रमोद कुशवाहा बताते हैं कि बीते जनवरी माह में स्पेशल सेल ने कुख्यात आतंकी शुभान कुरैशी उर्फ तौकीर को गिरफ्तार किया था।

उसने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि आतंकी हमलों में शामिल जुनैद भी उसके साथ नेपाल में ही छिपा है। वह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ाते थे। वहां दोनों ने फर्जी दस्तावेजों पर नेपाल की नागरिकता हासिल कर ली थी।

जुनैद ने अपना नाम बदलकर सलीम रख लिया था। जिस स्कूल में ये पढ़ाते थे वहां बच्चे जुनैद को सलीम सर कहकर पुकारते थे।आतंकी शुभान कुरैशी से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर स्पेशल सेल जुनैद की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था। इस दौरान पता चला कि वह नेपाल बॉर्डर के रास्ते से भारत आने वाला है। इस जानकारी पर स्पेशल सेल की टीम सक्रिय हो गई और उन्होंने उसे 14 फरवरी 2018  को गिरफ्तार कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि वह भारत में लगभग खत्म हो चुके आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन को जीवित करने आया था।

बम बनाने में माहिर है जुनैद

गिरफ्तार आतंकी जुनैद बम बनाने में माहिर है। दिल्ली, अहमदाबाद, जयपुर और यूपी में हुए सीरियल बम धमाकों में इस्तेमाल हुए अधिसंख्य बम उसने ही बनाये थे। इसके साथ ही वर्ष 2008 में ग्रेटर कैलाश में उसने खुद जाकर बम रखा था। उसने ही धमाकों के लिए सामान लाजपत नगर की सेंट्रल मार्किट से खरीदा था। बम ब्लास्ट की इन घटनाओं में 165 लोगों की मौत हो गई थी और 535 लोग घायल हो गए थे।

आजमगढ़ मॉड्यूल से जुड़ा था जुनैद

स्पेशल सेल के अनुसार आरोपी जुनैद आजमगढ़ का रहने वाला है और वहीं के मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था। इस मॉड्यूल में ऑपरेशन की जिम्मेदारी आतिफ अमीन को, बम बनाने का काम जुनैद और संगठन में भर्ती आदि काम तौकीर संभालता था।

हर पांच घंटे पर बदलता था ठिकाना

दिल्ली पुलिस सहित तमाम जांच एजेंसियों उसके पीछे लगी हुई थीं, इसलिए उसने एक ठिकाने पर ज्यादा समय नहीं गुजारा। दरअसल उसे इस बात का डर था कि वह किसी भी समय पकड़ा जा सकता है।

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