दावा बहुत है, तो दिखता क्यों नहीं

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बात 19 सितंबर, 2017 की है। राज्य सरकार के छह महीने पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मीडिया से मुखातिब हो रहे थे। इस दौरान उन्होंने जो दावे किए, उससे योगी के समर्थक मंत्र मुग्ध हैं। लेकिन, दूसरे पूछ रहे हैं कि विकास इतना अधिक हुआ, तो दिखता क्यों नहीं है?

दरअसल, मीडिया से बातचीत के दौरान आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की उपलब्धियों को एक-एक कर गिनाया। यह दावा किया गया कि छह माह की अल्प अवधि में ही प्रदेश में जो भय का वातावरण व्याप्त था, उसे दूर करने में सरकार सफल रही है। राज्य का प्रशासन और पुलिस व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त है।

पिछले छह महीने में पुलिस और अपराधियों के बीच 431 मुठभेड़ हुए हैं। इस दौरान 17 दुर्दांत अपराधी मारे गए और 1106 को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 868 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी हुई है। यह भी जानकारी दी गई कि इन  कार्रवाइयों के दौरान पुलिस के 88 जवान घायल हुए।

राज्य सरकार का यह भी दावा है कि उसने प्रदेश के 86 लाख लघु एवं सीमान्त किसानों के 36 हजार करोड़ रुपए का फसली ऋण माफ किया है। साथ ही किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए पांच हजार से अधिक गेंहू क्रय केंद्रों के माध्यम से करीब 37 लाख मीट्रिक टन गेंहू की खरीद सीधे किसानों से की गई, जबकि पूर्ववर्ती सरकारें पांच से सात लाख टन गेंहू की खरीद ही कर पाती थी। वह भी आढ़तियों के जरिए की जाती थी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपने छह महीने के कामकाज पर पीठ थपथपा रही है। वहीं
पिछले छह माह के दौरान हुई घटनाओं की याद दिलाकर विपक्ष राज्य
सरकार को कठघरे में ला रहा है।

योगी सरकार का दावा है कि प्रदेश में पहली बार किसानों को गन्ना मूल्य का 95 प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। सरकार की माने तो वह गन्ने की पेराई शुरू होने से पहले सम्पूर्ण गन्ना मूल्य का भुगतान कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं प्रदेश सरकार ने ट्यूबवेल के विद्युत संयोजन का आवदेन करने वाले प्रत्येक किसान को बिजली की सप्लाई करने के साथ ही उसकी बचत के लिए सोलर पंप देने की योजना संचालित की है।

राज्य सरकार किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़कर उनकी आय को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। लेकिन, कर्ज मांफी को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उससे किसानों की खुशी कम हो गई है। वे पूछ रहे हैं- ‘योगी सरकार ने कर्ज मांफी के लिए क्या आधार रखा है?’ कर्ज मांफी को लेकर कई शिकायतें प्रदेश भर से आ रही हैं। पिछले दिनों खबर आई कि मथुरा के एक किसान को चिट्ठी मिली है कि उसका एक पैसे का कर्ज माफ किया जाता है।  

बहरहाल, योगी सरकार सूबे के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत होने की बात कह रही है। ध्यान रहे कि वर्तमान समय में पुलिस विभाग में डेढ़ लाख पद खाली हैं। इस वर्ष राज्य सरकार 47 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। प्रदेश सरकार ने राजकीय नौकरियों में भेद-भाव समाप्त करने के लिए समूह ‘ख’ के अराजपत्रित पदों तथा समूह ‘ग’, ‘व’, ‘घ’ में सभी पदों की चयन प्रक्रिया में साक्षत्कार को समाप्त कर दिया है।

‘कौशल विकास मिशन’ के तहत छह लाख से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया है। राज्य सरकार इस वर्ष दस लाख नौजवानों को कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से रोजगार व स्वरोजगार प्रदान करेगी। 1 अक्टूबर, 2017 से राज्य सचिवालय में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की जा रही है। इस व्यवस्था से शासन-प्रशासन में पारदर्शिता आएगी।

साथ ही 1 जनवरी, 2018 से जिला मुख्यालयों में भी ई-ऑफिस व्यवस्था को प्रारम्भ करने का दावा सरकार ने किया है। इसी प्रकार राजकीय मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में ई-हॉस्पिटल व्यवस्था को लागू किया जाएगा।

राज्य सरकार ने यह भी दावा किया है कि फर्जी पंजीकरण को रोकने के लिए कार्यवाही की जा रही है। न्यायालय की अनुमति मिल जाने पर पंजीकरण को आधार से जोड़ा जाएगा। ग्राम समाज व शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा को हटाने के लिए ”एंटी भू-माफिया टॉस्क फोर्स” का गठन करते हुए एक पोर्टल की शुरुआत की गई थी। अभी तक भू-माफिया के कब्जे वाले 1.53 लाख मामले प्रकाश में आये हैं।

योगी सरकार का यह भी दावा है कि छह माह पहले ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत मात्र 10 हजार लाभार्थियों को आवास स्वीकृत किए गए थे। लेकिन, पिछले छह महीने में सराहनीय प्रगति हुई है। अब तक 9.76 लाख लाभार्थियों को इस योजना में पंजीकृत कर लिया गया। इनमें से आठ लाख से अधिक आवासों को स्वीकृत करने के पश्चात लाभार्थियों के खाते में सीधे धनराशि भी डाल दी गई है।

मुख्यमंत्री योगी पुरानी सरकारों की बजाय अपनी सरकार की खामियों पर श्वेत-पत्र जारी करते
तो बेहतर होता। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र सरकार की तरह हर
मोर्चे पर विफल रही है। वास्तव में योगी जी उल्टी गंगा बहाने की कोशिश कर रहे हैं। पुरानी सरकारों को घेरने की आड़ में अपनी जबर्दस्त नाकामी से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश
कर रहे हैं। – मायावती (पूर्व मुख्यमंत्री, उ.प्र.)

योगी सरकार की माने तो जब वह सत्ता में आई तो प्रदेश के एक करोड़ से अधिक परिवार बिजली की सुविधा से वंचित थे। लेकिन, बीते छह महीने में 16 लाख परिवारों को मुफ्त बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। स्मरण रहे कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था में वीआईपी कोटा समाप्त कर रोस्टर के अनुसार 24 घंटे, 20 घंटे और 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है।

 

सरकार ने जानकारी दी कि उसे विरासत में 1.21 लाख किलोमीटर सड़के बुरी हालत में मिली थीं। वर्तमान सरकार ने पहले सौ दिन में ही 80 हजार किलोमीटर सड़क को गड्ढामुक्त कर दिया। हालांकि, सरकार के इस दावे की कलई पहली बारिश खोल रही है। खैर! सरकार ने बताया कि 1 जुलाई से 31 अगस्त 2017 तक ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक परिषदीय विद्यालयों में 1.53 करोड़ छात्र-छात्राओं का नामांकन कराया गया।

छात्र-छात्राओं को बिना किसी शुल्क के आकर्षक स्कूल ड्रेस एवं पाठ्य पुस्तकों के वितरण का काम  भी लगभग पूरा हो चुका है। सरकार ने यह भी दावा किया कि वह बालिकाओं को ‘अहिल्याबाई कन्या नि:शुल्क शिक्षा योजना’ के तहत स्नातक स्तर तक की शिक्षा भी उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरों में स्ट्रीट लाइट पर होने वाली ऊर्जा बचत को देखते हुए परंपरागत मार्गों पर एलईडी लाइटें लगाने के लिए ईईएसएस से समझौता होने जा रहा है, जिसके तहत कंपनी सात वर्षों तक एलईडी का रख-रखाव भी करेगी। ‘सबका साथ, सबका विकास’ योजना के तहत दिव्यांगजन की पेंशन 300 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दी गई है।

छह महीने का कार्यकाल पूरा होने से पहले योगी सरकार की ओर से जारी किए गए श्वेत-पत्र एक झूठी किताब है। जैसे मैं मंत्रों का उच्चारण नहीं कर सकता हूं। वैसे ही वे सरकार नहीं
चला पा रहे हैं। किसी ने ठीक ही कहा है- ‘उम्र भर हम ये गलती करते रहे, धूल चेहरे पर थी और आइना साफ करते रहे।’ — अखिलेश यादव, (पूर्व मुख्यमंत्री उ.प्र)

राज्य सरकार का दावा है कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। जापानी इंसेफेलाइटिस से प्रभावित 38 जनपदों में पहली बार लक्ष्य से अधिक 92 लाख बच्चों का टीकाकरण कराया गया। इसके बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

राज्य सरकार ने अक्टूबर 2018 तक पूरे प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त करने का दवा किया है। राज्य सरकार का कहना है कि वह इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। अब तक शामली, हापुड़, बिजनौर और गाजियाबाद जनपद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। सरकार लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना का संचालन शुरू कराने के साथ-साथ राज्य के अन्य महत्वपूर्ण शहरों में मेट्रो ट्रांस्पोर्ट योजना बनाने की बात कर रही है।

इसके साथ ही मंडल मुख्यालयों को वायु मार्ग से जोड़ने पर तेजी से कार्य करने का दावा सरकार ने किया है। सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि वह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अयोध्या और मथुरा का विकास कर रही है। प्रयाग में होने वाले अर्धकुम्भ- 2019 की समुचित तैयारी के लिए 510 करोड़ रुपए की धनराशि अवमुक्त करने के साथ ही 34 परियोजनाओं का शिलान्यास किया जा चुका है।

इन दावों से लगता है कि योगी सरकार ने अपने छह माह के कार्यकाल को अभूतपूर्व उपलब्धि मान रही है। हालांकि, विपक्ष हमलावर है। वह पिछले छह माह के दौरान हुई घटनाओं की याद दिलाकर राज्य सरकार को कठघरे में ला रहा है।  

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