जिन संग्रहालयों का प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन..

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जो दो सालों में हुआ है, वह पिछले दस सालों में नहीं हुआ। वहां पर कार्यरत एक कर्मचारी ने यही कहा। उसने जो बताया, वह मुख्य दरवाजे से दिख रहा था। तमाम कारीगर काम में जुटे थे।

कोई लाल किले के भीतरी दीवार पर नई डिजाइन बना रहा था तो कहीं पुराने पत्थरों को बदला जा रहा था। उसे देखकर लग रहा था कि लालकिले को सजाया जा रहा है। उसमें चार संग्रहालय विकसित किये जा रहे हैं।

इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को करने जा रहे हैं। इन संग्रहालयों में क्रमश: भारत की ऐतिहासिक घटनाओं को रोचक ढंग से पेश किया जाएगा। पहले में एक कॉलोनियल भवन में भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं को दर्शाया जायेगा।

वहीं दूसरे में प्रथम विश्व युद्ध में भारत की भागीदारी का संपूर्ण संग्रह होगा। तीसरे में सुभाष चंद्र बोस और उनकी सेना आजाद हिंद फौज से जुड़ी यादगार वस्तुओं को रखा जाएगा। इसके साथ चौथे कॉलोनियल भवन में लाल किले (मुमताज महल) में पुरातत्व संबंधी संग्रहालय को विस्थापित किया जाएगा। मुमताज महल का यह संग्रहालय सौ साल पुराना है।

इन संग्रहालयों में धरोहरों को इस तरह प्रदर्शित किया जाएगा जिससे वे खराब भी न हों और सैलानियों की इनको देखने में दिलचस्पी भी बढ़े। हर एक संग्रहालय में डिजिटल गैलरी बनाई जाएगी और पर्यटक स्क्रीन पर भी धरोहरों के बारे में विस्तार से जानकारी ले सकेंगे। इन बदलावों का कारण बेहद महत्वपूर्ण है।

“लालकिले में इतिहास के उन पन्नों को सजाया और संवारा जा रहा है जो कई दशकों से उपेक्षित रहे हैं। सरकार उसे जनमानस के सामने लाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। 72वें स्वतंत्रता दिवस  पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसे देश को समर्पित करेंगे।”

यहां काम में लगे लोगों से बातचीत में जानकारी मिली कि संग्रहालय का काम 20-25 दिन में पूरा हो जायेगा। यहां जिस भी कर्मचारी से बात हुई, सभी ने हमको इस काम की तेजी के पीछे एक नाम बताया वो था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एसएसआई) की महानिदेशक ऊषा शर्मा का।

लाल किले में काम की निगरानी कर रहे एक व्यक्ति ने बताया कि महानिदेशक ने पूरे काम को युद्ध स्तर पर करवाया। उनके खुद के प्रयासों से काम को जल्द पूरा कराने का दबाव अधिकारियों पर बना।

नये संग्रहालय पूरी तरह सेंट्रलाइज एयर कंडिशन(एसी)  से लैस होंगे। लेकिन ऐसा नहीं है कि नया बनाने के लिए किसी भी इमारत से कोई छेड़छाड़ की गई है। सलीम गढ़ स्वतंत्रता सेनानी स्मारक के पहले स्थित ब्रिटिशकालीन इन चार इमारतों को नये सिरे से सुधारा जा रहा है।

चूंकि इमारत पुराने ढंग की है इसलिए खुली जगहों पर शीशे लगाये जा रहे हैं जिससे एयर कंडिशन(एसी) पूरी तरह से काम कर सके।

राष्ट्रीय धरोहर घोषित होने के पहले यहां भारतीय सेना के रहने के लिए आवास बनाये गये थे।

उनको अब ध्वस्त करके खाली जगहों पर घास और पेड़ लगाकर बगीचे बनाये जा रहे हैं। इससे समझा जा सकता है कि संग्रहालय पूरी तरह से प्राकृतिक हरियाली से आच्छादित होगा। पार्कों के विकास के साथ-साथ पुराने निर्माण तोड़ने का कार्य भी जारी है ।

एएसआई के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार संग्रहालय की व्यवस्था तो पहले भी यहां थी। लेकिन बदलती तकनीक के दौर में संग्रहालयों के नवीनीकरण का दौर तेजी से किया जा रहा है। इसी क्रम में लाल किला स्थित संग्रहालयों को तकनीकी रूप से भव्य बनाया जा रहा है।

पहले के संग्रहालय थोड़ा नीरस से हो गए थे। लाल किला तकनीकी बदलाव  से गुजर रहा है। यहां इतिहास से जुड़ी जानकारियां और रोचक हो जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक इस नये बदलाव के बाद पर्यटकों की संख्या में बड़े पैमानें पर इजाफा होने के आसार हैं।

अब संग्रहालय को अंग्रेजों के जमाने में बनी इस इमारत में विस्थापित करने का काम जोरों पर है। पुराना संग्रहालय में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े विभिन्न आयामों की याद दिलाता है। इसमें झांसी की रानी से लेकर बहादुर शाह जफर तक की यादें संजोई गई हैं ।

इसके साथ स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय भी यहां नये रूप में देखने को मिलेगा। यह वही इमारत है जिसमें बंदी बनाए गए आजाद हिंद फौज के अधिकारियों के मामले की सुनवाई के लिए अदालत लगी थी। अब नये निर्माण में इन्हीं जानकारियों को पूरे नये कलेवर में पेश किया जा रहा है।

सरकार लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारतों के प्रति बेहद संजीदा दिख रही है। जिसके परिणाम भी तेजी से सामने आने लगे हैं। किले के अंदर सभी पुराने बिजली के कामों का नवीनीकरण किया जा रहा है।

हालांकि अभी एएसआई ने लालकिला स्थित सभी संग्रहालयों को बंद करके रखा है। मिली जानकारी के अनुसार इन संग्रहालयों को 15 अगस्त को नये भवन में खोला जाएगा।

इसके साथ ही लालकिले की कैंटीन को भी बंद कर दिया गया है। इसको आधुनिक रूप से निर्मित किया जा रहा है। इसमें यहां आने वाले सैलानियों को नये नये स्वाद के व्यंजन भी मिल सकेंगे।

यह जल्द ही जनता के लिए खोल दिया जाएगा। माना जा सकता है कि15 अगस्त को इनके उद्घाटन के बाद लोग इसे देख सकेंगे।

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