जांच के शिकंजे में चिदंबरम

पी.चिदंबरम जांच एजेंसियों के शिकंजे में हैं। उन पर आरोप बहुत संगीन है। बतौर वित्त मंत्री एयरसेल-मैक्सिस मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने 2006 में मृत पड़ी एयरसेल को खरीदने के लिए मैक्सिस को 4700 करोड़ रुपए लाने की अनुमति दी थी।

जबकि कायदे से बतौर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड अध्यक्ष वे इतनी बड़ी धनराशि के निवेश की अनुमति नहीं दे सकते थे। इसके लिए उन्हें कैबिनेट से अनुमति लेनी थी। पर सत्ता के नशे में चूर चिदंबरम ने कैबिनेट से अनुमति लिए बगैर ही मैक्सिस को 4700 करोड़ निवेश करने दिया।

इस मामले में उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को दबोचा गया। वजह यह है कि मैक्सिस ने रिश्वत की रकम कार्ति को दी थी। उसने मलेशियाई मैक्सिस कंपनी से दो मिलियन डॉलर लिया था। प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक कार्ति के खाते से जब्त किया है।

दूसरी आईएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने मामला दर्ज कर रखा है। इसमें भी आरोपी चिदंबरम कुल के चिराग कार्ति हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड और आयकर विभाग से आईएनएक्स मीडिया को बचाने के लिए रिश्वत ली थी।

कंपनी की मुखिया इन्द्राणी मुखर्जी ने अपने बयान में इस बात की स्वीकार भी किया है। इंद्राणी मुखर्जी ने गवाही दी है कि चिदंबरम के निर्देश पर उन्होंने 2007 में कार्ति को पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

“सत्ता के नशे में चूर चिदंबरम ने कैबिनेट से अनुमति लिए बगैर ही मैक्सिस को 4700 करोड़ निवेश करने दिया।  ”

उन्होंने यह भी बताया कि वह भुगतान कहां हुआ था?  वे कहती हैं कि कार्ति से मुलाकात दिल्ली के हायत होटल में हुई थी। वहां पर एक मिलियन डॉलर का भुगतान किया गया था। घूस की रकम का एक हिस्सा पी. चिदंबरम के खाते में भी गया था। इन दोनों मामले में पी.चिदंबरम पर संदेह की सुई रूकी है।

एयरसेल-मैक्सिस मामले में 5 जून को निदेशालय ने चिदंबरम को पूछताछ के लिए बुलाया। उनसे सात घंटे पूछताछ हुई। चिदंबरम ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें लेन-देन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने तो महज फाइल पर हस्ताक्षर किया था।

शाम को 7 बजे के बाद निदेशालय से बाहर आने के बाद चिदंबरम ने ट्वीट  किया। उन्होंने कहा कि निदेशालय उन्हें बिना वजह परेशान कर रहा है। उनके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है। फिर निदेशालय इस तरह का बर्ताव मेरे साथ क्यों कर रहा है? वह मेरी जांच करने पर क्यों आमादा है?

“एयरसेल-मैक्सिस मामले में 5 जून को निदेशालय ने चिदंबरम को पूछताछ के लिए बुलाया। उनसे सात घंटे पूछताछ हुई। चिदंबरम ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें लेन-देन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने तो महज फाइल पर हस्ताक्षर किया था। ”

चिदंबरम लिखते हैं कि एयरसेल-मैक्सिस सौदे से संबंधित सारे जवाब निदेशालय के दस्तावेजों में पहले से ही दर्ज है। इससे पहले सुबह 10 बजे तक, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में चिदंबरम के वकीलों ने अग्रिम जमानत के लिए पुरजोर कोशिश की थी।

निदेशालय के वकील ने कहा कि उन्हें चिदंबरम की याचिका पर जवाब देने के लिए समय चाहिए। विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी ने निदेशालय को 10 जुलाई तक समय दिया है और साथ में निर्देश दिया कि एजेंसी को उस तारीख तक जबरदस्त कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

इस वजह से उन्हें 12 जुलाई तक गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। आईएनएक्स मीडिया मामले में 6 जून को सीबीआई ने उन्हें तलब किया था। उन पर इस मामले में कोई एफआईआर तो नहीं दर्ज है। उन पर संदेह होने की वजह से पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

शेयर करें
पिछला लेखशिलांग में भड़की हिंसा का सच
अगला लेखयोग सभी के लिए
mm
पिछले चार सालों में जितेन्द्र ने जो रिपोर्ट लिखी है, उससे इनकी पहचान एक खोजी पत्रकार की बनी है। देश-दुनिया की आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी वे मौलिक दृष्टि रखते हैं। सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन का विषय चतुर्वेदी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

पाठक की प्रतिक्रिया

Please enter your comment!
Please enter your name here