कलाकारों की ट्रेड यूनियन

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सिंटा-सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन, 78 साल पुरानी ट्रेड यूनियन है। इसके गठन का श्रेय हिंदी सिनेमा के इतिहास पुरुष सोहराब मोदी को जाता है। वही इसके संस्थापक अध्यक्ष थे।

तब 1939 में इसका नाम ‘द फिल्म आर्टिस्ट एसोसिएशन’ होता था। तब से लेकर 1958 तक यह मात्र फिल्मी कलाकारों का यूनियन भर ही था।

जून 1958 को इसका निबंधन भारतीय ट्रेड यूनियन के तहत हो गया। इसका मकसद अपने सदस्यों के हितों की रक्षा करना था।

अपने जरूरतमंद सदस्यों को आर्थिक सहायता, चिकित्सा सहायता के साथ इसके सदस्यों,निर्माताओं और अन्य लोगों के बीच के विवाद को सुलझाना है।

“सिंटा की मांग है कि मुंबई के विभिन्न स्टूडियो में लगने वाली आग की जांच के साथ ही रोकथाम के बेहतर उपाय हों”

अपने काल में मातृ शक्ति के प्रतीक और हिंदी फिल्मों की सबसे बडीं मां दुर्गा खोटे अध्यक्ष बनी। अन्य फिल्मों के अतिरिक्त दुर्गा खोटे मशहूर फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की जोधा बाई के रूप से भी जानी जाती हैं। 1939 में जन्मी दुर्गा खोटे का  देहांत 1991 में हो गया था। अपने समय की वह बीए पास महिला थीं।

आज सिंटा के लगभग 7000 सदस्य हैं जिनमें जीवित और सबसे अधिक उम्र वाले 90 के पार हैं दिलीप कुमार। 70 के पार वाले सक्रिय सदस्य हैं अमिताभ बच्चन और अन्य प्रसिद्ध जाने -माने और अनजाने कलाकार।

सिंटा के अध्यक्ष होते हुए ओम पुरी का देहांत हुआ था। इसके पहले अमजद खान, अमरीश पुरी और दारा सिंह भी अध्यक्ष काल में ही नहीं रहे। आज सिंटा के अध्यक्ष हैं विक्रम गोखले, महासचिव हैं सुशांत सिंह और कोषाध्यक्ष हैं दीपक  केजरीवाल।

दीपक केजरीवाल का कहना है कि बड़े और नामवर कलाकारों में सलमान खान का ‘बिइंग ह्यूमन’ सिंटा की सिफारिश पर 20 से 25 हजार की आर्थिक सहायता भी जरूरतमंद कलाकारों को करता है।

इसकी वार्षिक  सदस्यता है 1200 रुपया माहवार। बहुत सारे लोग एकमुश्त भुगतान कर आजीवन सदस्य भी हो जाते हैं। सदस्य बनने के लिए प्रवेश शुल्क 10 हजार रुपए है।

इसका सबसे बड़ा उद्देश्य फिल्मी कलाकारों को बीच ‘एक बिरादरी’ का भाव लाना है। सिंटा कलाकार और निर्माता या प्रोडक्शन कंपनी के बीच लेन-देन को सुलझाना है,और  उसका पारिश्रमिक दिलवाना है ।

सिंटा कुछ मायने में व्यावाहारिक भी है क्योंकि उनके सामने एक समस्या सदस्यों की कलाकार के रूप में काम न करना है। इसका मतलब यह है कि सदस्य बनने के बाद सदस्य को फिल्म-टेलिविजन में काम न मिलने पर कोई और काम धंधा कर लेना है।

दरअसल सच यह भी है 7 हजार के आसपास की सदस्यता के बावजूद सक्रिय यानी जिन्हें फिल्म-टेलिविजन में लगातार काम मिल रहा हो ,ऐसे सदस्य लगभग एक हजार ही होंगे।

“आज सिंटा के लगभग 7000 सदस्य हैं जिनमें जीवित और सबसे अधिक उम्र वाले 90 के पार हैं दिलीप कुमार। 70 के पार वाले सक्रिय सदस्य हैं अमिताभ बच्चन और अन्य प्रसिद्ध
जाने -माने और अनजाने कलाकार।”

इसीलिए शूट के दौरान किसी सदस्य की दुर्घटना मृत्यु पर 2 लाख का मुआवजा मिलता है। अगर कोई सदस्य कम से कम सदस्यता का 5 साल पूरा कर लेता है तो स्वाभाविक मृत्यु की हालत में 75 हजार दिया जाता है।

अपने कुछ सदस्यों को सिंटा बेकार होने की हालत में मासिक सहायता भी करता है। जो सदस्य लगातार 15 साल तक सदस्य बने रहते हैं और उनकी उम्र 65 साल की हो जाती है, उन्हें मासिक सदस्यता शुल्क से मुक्त कर दिया जाता है।

सिंटा का एक संकट जूनियार कलाकारों का संगठन भी है। पर वह अब सिंटा के सदस्य बन सकते हैं। जूनियर कलाकारों की संगठन की सदस्यता 8 लाख रुपये तक में बिकती है या पुश्तैनी होती है।

अपनों की मदद के लिए कलाकार भी करने जा रहे हैं स्टार कलाकार शो! इसके अलावा सिंटा का प्रबंधन लगातार कोशिश कर रहा है कि  विभिन्न स्टूडियो में जो आग लग रही है उसकी पूरी जांच हो।

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