ओलंपिक में पदक की उम्मीद जगी

0
26

इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबर्ग में चल रहे 18वें एशियाई खेलों में भारतीय खिलाडि़यों ने अपने दमखम का प्रदर्शन कर जहां कई नए रिकॉर्ड दर्ज किये, वहीं अपने हौसले और जुनून के दम पर भारत की झोली में पदक भी बरसाए।

इन खेलों में जिस तरह से भारतीय दल में शामिल खिलाडि़यों ने अपनी खेल-प्रतिभा को दर्शाया है उससे 2020 में होने वाले ओलंपिक को लेकर खेल प्रशंसकों की उम्मीदें हिलोरें मारने लगी हैं। अगर भारतीय खिलाडि़यों का यह दमखम बरकरार रहा और उन्होंने अपने खेल को और मांजा तो कहना गलत न होगा कि ओलंपिक खेलों में भारत अब की अपनी अलग छाप छोड़ेगा।

शार्दुल विहान को रजत

खासकर युवा निशानेबाजों ने अपने प्रदर्शन से दिखा दिया कि आने वाला जमाना उनका है। जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं उस उम्र में यदि कोई खिलाड़ी अपने देश के लिए पदक जीते तो इससे ज्यादा गर्व की बात और क्या हो सकती है?

बात हो रही है शार्दुल विहान की। 15 वर्ष की छोटी उम्र में शार्दुल विहान ने डबल ट्रैप राइफल स्पर्धा में भारत को रजत पदक दिलाया। शार्दुल मौजूदा एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले भारत के तीसरे सबसे युवा एथलीटों में से एक हैं। उनके साथ सूची में सौरभ चौधरी और लक्ष्य शामिल हैं।

सोने के युवा

27 वर्षीय महिला निशानेबाज राही सरनोबत ने दिखा दिया कि महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं। राही ने एशियाई खेलों के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया। वहीं 20 वर्षीय नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में पहली बार सोना भारत के नाम किया।

“एशियाई खेलों में जिस तरह से भारतीय दल में शामिल खिलाडि़यों ने अपनी खेल-प्रतिभा को दर्शाया है उससे 2020 में होने वाले ओलंपिक को लेकर खेल-प्रशंसकों की उम्मीदें हिलोरें मारने लगी हैं। अगर इन खिलाडि़यों का यह दमखम बरकरार रहा और अपने खेल को और मांजा तो कहना गलत न होगा कि ओलंपिक खेलों में भारत अब की अपनी अलग छाप छोड़ेगा। ”

नीरज इससे पहले 2016 में हुए ओलंपिक में कांस्य पदक अपने नाम कर चुके हैं। यह कांस्य उन्होंने भाले को 85.38 मीटर दूर फेंक अपने नाम किया था। वहीं जकार्ता में उन्होंने 88.06 की दूरी पर भाला फेंक सोना जीत लिया।

विनेश फोगाट ने रचा इतिहास

एशियाई खेलों में इतिहास रचते हुए 50 किलोग्राम फ्री स्टाइल कुश्ती में विनेश फोगाट ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इस उपलब्धि के साथ वह पहली भारतीय महिला पहलवान बनी हैं, जिन्होंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया हो।

बजरंग पूनिया से बड़ी उम्मीद

सुशील कुमार के बाद कुश्ती में भारत की नई उम्मीद बने बजरंग पूनिया ने लगातार अपने अच्छे प्रदर्शन से ओलंपिक में पदक की उम्मीद जगा दी है। राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता बजरंग ने 18वें एशियाई खेलों में भी स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया।

बजरंग ने पुरुषों की 65 किलो ग्राम स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में जापान के ताकातानी दाइचि को 11-8 से हराते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।

“महिला टेनिस में अंकिता रैना ने अपने प्रदर्शन से सबको अचंभित कर दिया। अंकिता रैना ने 18वें एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया।”

बजरंग ने एशियाई खेल-2014 में रजत पदक जीता था, जिसका रंग वह इस बार बदलने में कामयाब रहे। 24 वर्षीय पहलवान बजरंग ने एशियाई खेलों से पहले लगातार 3 स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। उन्होंने योगेश्वर दत्त के प्रदर्शन को दोहराया, जिन्होंने चार साल पहले स्वर्ण पदक जीता था।

अंकिता रैना ने किया अचंभित

महिला टेनिस में अंकिता रैना ने अपने प्रदर्शन से सबको अचंभित कर दिया। अंकिता रैना ने 18वें एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल कर इतिहास रच दिया। वह एशियाई खेलों के महिला टेनिस एकल स्पर्धा में पदक जीतने वाली भारत की दूसरी महिला टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं। अंकिता से पहले  सानिया मिर्जा ने दोहा में वर्ष 2006 में रजत पदक जीता था।

रोहन बोपन्ना-दिविज शरण की जोड़ी को स्वर्ण

रोहन बोपन्ना और दिविज शरण की जोड़ी ने पुरुष युगल में स्वर्ण पदक हासिल किया। बोपन्ना और शरण की जोड़ी ने कजाकिस्तान के अलेक्जेंडर बबलिक और डेनिस येवसेयेव की जोड़ी को 6-3, 6-4 से पराजित कर स्वर्ण हासिल किया।

पुरुष हॉकी टीम ने तोड़ा 86 साल पुराना रिकॉर्ड

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने शुरुआती मैचों में शानदार प्रदर्शन कर 86 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। भारतीय टीम ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए हांगकांग को 26-0 से रौंद दिया। भारत ने 1932 में ओलंपिक में ध्यानचंद के नेतृत्व में अमेरिका को 24-1 से मात दी थी जो उसकी सबसे बड़ी जीत थी।

रजत से संतोष

घुड़सवारी में पहली बार फवाद मिर्जा ने रजत पदक हासिल किया। इसके बाद टीम स्पर्धा में भारत को दूसरा रजत मिला। एथलेटिक्स में हिमा दास व मोहम्मद अनस ने 400 मीटर दौड़ और दुती चंद ने 100 मीटर फर्राटा दौड़ में रजत जीता। बैडमिंटन में साइना नेहवाल ने कांस्य पदक जीता। पीवी सिंधु फाइनल में पहुंच गयीं।

दिग्गजों ने किया निराश

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार का अभियान निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। पुरुषों के 74 किग्रा वर्ग में सुशील क्वॅलिफिकेशन दौर में ही हारकर बाहर हो गए। बैडमिंटन में किदाम्बी श्रीकांत और एचएस प्रणय व जिमनास्ट दीपा कर्माकर ने भी निराश किया। यही हाल कबड्डी टीम का भी रहा। इन खेलों में लगातार स्वर्ण जीतने वाली पुरूष टीम को कांस्य और महिला टीम को रजत पदक मिला।

पाठक की प्रतिक्रिया

Please enter your comment!
Please enter your name here