‘ईमानदार’ सरकार की खुली पोल

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रविंद केजरीवाल की ‘ईमानदार’ सरकार ने मजदूरों का 139 करोड़ रुपये हजम कर लिया है। भ्रष्टाचार निरोधी शाखा ने इस बाबत एफआईआर दर्ज की है।

उसके मुताबिक केजरीवाल सरकार ने निर्माण मजदूरों के नाम पर फर्जी लोगों का पंजीकरण करवाया। वे ऐसे लोग है जो मजदूर न होकर, नौकरी-चाकरी करते हैं।

बावजूद इसके उन लोगों का पंजीकरण बतौर निर्माण मजदूर बोर्ड में कराया गया। इन लोगों को फर्जी तरीके से शिक्षा, अंतिम संस्कार के नाम पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक दिए गए हैं।

केजरीवाल सरकार के इस फर्जीवाड़े की शिकायत दिल्ली निर्माण और अन्य कामगार बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और भाजपा नेता सुखबीर शर्मा ने ‘यथावत’  का हवाला देते हुए, भ्रष्टाचार निरोधी शाखा में की थी।

एसीबी चीफ अरविंद दीप ने बताया कि भ्रष्टाचार निरोधी शाखा को चार हफ्ते पहले घोटाले को लेकर एक शिकायत मिली थी। उसकी जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

“दिल्ली में भवन निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए बने कोष में 2300 करोड़ रुपये हैं। उसकी लूट शुरू हो गई है।”

जांच के लिए छह लोगों की एक टीम बनाई गई है, जो रोजाना जांच की प्रगति के बारे में बताती है। वे कहते हैं कि अभी तक हमने छह ऐसे लोगों के बयान लिए हैं जिन्होंने मजदूर का प्रमाण पत्र बनाकर बोर्ड से पैसे लिए हैं।

उनमें से कोई बुटीक मालिक है तो कोई फैक्ट्री मालिक। चौंकाने वाली बात है कि यह खेल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और श्रममंत्री गोपाल राय की निगरानी में हुआ। इन लोगों ने जानबूझकर फर्जी मजदूरों के पंजीकरण को बढ़ावा दिया।

इसके लिए बाकायदा  यूनियन बनवाई। यूनियन को फर्जी पंजीकरण का काम सौंपा गया। यूनियन ने अपना काम बखूबी निभाया। पिछले तीन साल में ‘ईमानदार’ सरकार के गुर्गो ने पांच लाख से ज्यादा निर्माण मजदूरों का पंजीकरण कराया।

इनमें से 80 फीसद पंजीकरण को भ्रष्टाचार निरोधी शाखा ने फर्जी पाया। इस मसले पर ‘यथावत’ ने  1-15 फरवरी 2018 वाले अंक कवर स्टोरी की थी। उसमें ‘ईमानदार’ सरकार की पोल खोल गई थी।

बताया गया था कि निर्माण मजदूर कल्याण के लिए बने कोष का दुरुपयोग अरविंद केजरीवाल सरकार कर रही हैं। यह काम योजना के तहत हो रहा है।

निर्माण मजदूरों का पैसा हड़पने के लिए निर्माण बोर्ड का गठन सरकार ने अपने हिसाब से किया। उप राज्यपाल की अनुमति लिए बना बोर्ड का चेयरमैन श्रम मंत्री गोपल राय को बना दिया गया।

“इस मसले पर ‘यथावत’ ने  1-15 फरवरी 2018 वाले अंक कवर स्टोरी की थी। उसमें ‘ईमानदार’ सरकार की पोल खोल गई थी।”

गोपाल राय ने निर्माण बोर्ड के पैसे का उपयोग पार्टी खड़ी करने के लिए किया, जो सीधे जनहित और मजदूरों के साथ धोखा था। इससे कई अधिकारी व्यथित थे। लिहाजा उन लोगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

इसकी वजह यह थी कि वे फर्जी पंजीकरण करने के लिए तैयार नहीं थे। पर सरकार उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर रही थी। जब वे तैयार नहीं हुए तो उन्हें डराया-धमकाया जाने लगा।  

फिर भी सरकार के गलत काम में भागीदार बनने के लिए वे तैयार नहीं हुए। तब उन पर हमला कराया जाने लगा।  पर वे इससे डरे नहीं। उन्होंने अपनी मुहिम जारी रखी।

उसका खामियजा भी उन्हें भुगतान पड़ा। साठगांठ करके ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। उन्हें महज इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि उनकी वजह से केजरीवाल सरकार का ‘मजदूर घोटाला’ उजागर हो सका है।

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